राजस्थान का आतंरिक अपवाह तंत्र

राजस्थान का आतंरिक अपवाह तंत्र

राजस्थान का आतंरिक अपवाह तंत्र

राजस्थान के अपवाह तंत्र के क्षेत्र के आधार पर तीन भागों में बाँटा गया है।
1. राजस्थान का आतंरिक अपवाह तंत्र (60.2%)
2. अरब सागरिय अपवाह प्रणाली (17.1%)
3. बंगाल की खाड़ी की अपवाह प्रणाली (22.4%)

ऐसी नदियाँ जिनका उद्गम या विलीन अथवा दोनों राजस्थान में ही है वे नदियां इस तंत्र के अंतर्गत आती है। वे नदियां किसी और नदी की सहायक नदी भी नहीं है।

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राजस्थान का आतंरिक अपवाह तंत्र

घग्घर नदी

  • राजस्थान की आन्तरिक प्रवाह की सर्वाधिक लम्बी नदी घग्घर नदी है।
  • उदगम स्थान – हिमांचल प्रदेश में कालका के निकट शिवालिका की पहाडि़यों से 
  • बहाव – यह नदी पंजाब व हरियाणा और राजस्थान
  • राजस्थान में प्रवेश – हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी नामक स्थान से
  • राजस्थान में समाप्त – भटनेर दुर्ग के पास
  • बाढ़ की स्थिति में यह नदी गंगानगर जिले में प्रवेश करती है और सुरतगढ़ और अनुपगढ़ में बहती हुई पाकिस्तान के बहावलपुर जिले में प्रवेश करती है।
  • नदी की समाप्ती – फोर्ट अब्बास (पाकिस्तान)नामक स्थान पर
  • विकसित सभ्यता – कालीबंगा सभ्यता
  • घग्घर नदी के पाट को नाली भी कहते हैं।
  • इस नदी की कुल लम्बाई 465 कि.मी. है।
  • घग्घर नदी के अन्य नाम – सरस्वती नदी, मृत नदी, द्वषवती नदी, सोतर नदी
  • यह नदी प्राचीन सरस्वती नदी की धारा है।
  • वैदीक काल में इसे द्वषवती नदी कहते है।

कालीबंगा सभ्यता का विकास

5000 वर्ष पूर्व इस नदी के तट पर कालिबंगा सभ्यता विकसित हुई। इस नदी के कारण हनुमानगढ़ राजस्थान का धान का कटोरा कहा जाता है। यह राजस्थान की एकमात्र अन्तर्राष्टीय नदी है।
पाकिस्तान में इस नदी को हकरा (फारसी भाषा का शब्द) के नाम से जाना जाता है।

कांतली नदी

  • उदगम स्थान – उद्गम सीकर जिले में खण्डेला की पहाडि़यों
  • शेखावाटी क्षेत्र की एकमात्र नदी है।
  • यह नदी झुंझुनू जिले को दो भागों में बांटती है।
  • सीकर जिले में इस नदी का बहाव क्षेत्र तोरावाटी बेसिन कहलाता है।
  • विकसित सभ्यता – गणेश्वर सभ्यता
  • लम्बाई – 100 कि.मी. 
  • समाप्त – झुंझुनू व चुरू जिले की सीमा पर

गणेश्वर सभ्यता का विकास

लगभग 5000 वर्ष पूर्व सीकर जिले मे इस नदी के तट पर गणेश्वर सभ्यता का विकास हुआ। यहाँ से मछ़ली पकडने के 400 कांटे प्राप्त हुए है।

काकनेय नदी

  • आन्तरिक प्रवाह की सबसे छोटी नदी
  • उद्गम स्थान – कोटड़ी गांव (जैसलमेर) से
  • समाप्त – यह नदी उत्तर-पश्चिम में बुझ झील में जाकर समाप्त हो जाती है।
  • कभी कभी अत्यधिक वर्षा के कारण यह मौसमी नदी  मीडा खाड़ी में अपना जल गिराती है।
  • स्थानीय लोग इसे मसूरदी कहते है।
  • इस नदी कुल लम्बाई 17 कि.मी है।

साबी नदी

  • उद्गम स्थान – जयपुर जिले में सेवर की पहाडि़यों से 
  • बहाव – यह नदी उतर-पूर्व की ओर बहकर अलवर जिले में 
  • समाप्त – हरियाणा के गुड़गांव जिले नजफरगढ़ के समीप पटौती में

रूपारेल नदी

  • उद्गम स्थान – अलवर जिले के उदयनाथ पहाड़ी से ,
  • समाप्त – कुसलपुर (भरतपुर)
  • रूपारेला नदी भरतपुर की जीवन रेखा है।

मैन्था नदी

  • उद्गम स्थान – यह नदी जयपुर के मनोहरथाना से
  • समाप्त – सांभर झील में विलन

रूपनगढ़ नदी

  • उद्गम स्थान – यह सलेमाबाद(अजमेर) से
  • समाप्त – सांभर के दक्षिण में
  • इस नदी के किनारे निम्बार्क सम्प्रदाय की पीठ है।

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